Jaane naa kahan woh duniya hai...
jaane naa woh hai bhi yaa nahi...
jahan meri zindagi mujhse...
itni khafaa nahi...
This world amazes & disgusts me at the same time so here I am to share my world with you through my eyes...

Saturday, April 11, 2009

What is this life if full of care...we have no time to stand and stare...

शहर की इस दौड़ में दौड़ के करना क्या है?
अगर यही जीना है दोस्तों तो फिर मरना क्या है?

पहली बारिश में train लेट होने की फिक्र है...
भूल गए, भीगते हुए तेहेलना क्या है?

सीरियल के किरदारों का सारा हाल है मालूम...
पर माँ का हाल पूछने की फुरसत कहाँ है?

आप रेत में नंगे पाव तेहेलते क्यों नहीं?
108 हैं चैनल पर दिल बेहेलते क्यों नहीं?

internet से दुनिया से तो touch में हैं...
लेकिन पड़ोस में कौन रहता है जानते तक नहीं...

Mobile, landline सब की भरमार है...
लेकिंग जिगरी दोस्त तक पोहोचें ऐसे तार कहाँ हैं?

कब डूबते हुवे सूरज को देखाथा याद है?
कब जाना था शाम का गुज़रना क्या है?

शहर की इस दौड़ में दौड़ के करना क्या है?
अगर यही जीना है दोस्तों तो फिर मरना क्या है?